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क्या अप्प जानते है वो ७ दिन जिसमे गुरु गोबिंद जी का पूरा परिवार शहीद हुआ था



सवा लाख से एक लड़ाऊं,
चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं,
तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं ||

ये जो सप्ताह अभी आने वाला है, यानि 20 दिसम्बर से ले के 27 दिसम्बर तब सारे हिंदुस्तानी गोरे बन जाएंगे और मेरी क्रिसमस से whats app और फेसबुक भर जायेगा

किन्तु कितने जानते हैं, कि इन्ही 7 दिनों में गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था ।
एक ज़माना था जब यहाँ पंजाब में इस हफ्ते लोग गुरु गोबिंद जी की  कुर्बानियों को याद करके ज़मीन पे सोते थे, क्योंकि माता गूजरी ने वो रात , दोनों छोटे साहिबजादों के साथ , नवाब वजीर खां की गिरफ्त में , सरहिन्द के किले में , ठंडी बुर्ज में गुजारी थी।

ये सप्ताह सिख इतिहास में शोक का सप्ताह होता है, पर आज देखते हैं कि पंजाब समेत पूरा हिन्दुस्तान जश्न में डूब जाता है।

गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस अहसान फरामोश मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया ।
जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है।
कुछ कौमे थी जो मुगलों से ना तो डरी ना ही मुगलों के अत्याचारों के आगे घुटने टेक कर उन्होंने अपना धर्म बदलने को सोचा। मुगलों के आने से पहले भारत मे हिन्दू ही एकमात्र धर्म था। और कुछ लोगों ने अपनी माँ के समान धर्म को त्याग कर दूसरे धर्म को अंगीकार कर लिया।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना पूरा परिवार धर्म की रक्षा में कुर्बान कर दिया लेकिन विदेशी धर्म नही अपनाया। ऐसे धर्म की रक्षा करने वाले वीर को कोटि कोटि नमन।
भारत की 80% जनता आज भी वो गौरवान्वित भारतीय हैं जो मर तो जाएंगे लेकिन धर्म नही बदलेंगे।
आज के हर भारतवासी को इसकी जानकारी होनी चाहिये। कि फिर कभी हिंदुस्तान पर ऐसा वक़्त ना पड़े। किसी धर्म के रक्षक को अपने मासूम बच्चे दीवारों में ना चुनवाने पड़ें।
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