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History of ‪Alauddin Khilji


‪Alauddin Khilji


History of ‪Alauddin Khilji


अलाउद्दीन एक महत्वाकांक्षी और बलवान परन्तु घूर्त शासक था। अलाउद्दीन खुद को “दूसरा एलेग्जेंडर” समझता था। अलाउद्दीन को  “सिकंदर-ए-शाही” का औधा (की उपाधि) भी दिया गया था। अपने समय में अलाउद्दीन ने मदिरा सेवन में प्रतिबन्ध लगा रखा था।

1308 में मलिक काफूर जो अलाउद्दीन का एक वफादार सहायक था एशिया के दक्षिण भाग की जानकारी लेने निकला था। मलिक काफूर का मुख्य उद्देश्य कृष्णा नदी के दक्षिण पर स्थापित होयसला साम्राज्य के वरंगल पर जीत हासिल करना और दक्षिण में मदुरा के व्यापार को बढ़ाना था। 1311 में मलिक काफूर दिल्ली वापिस आया। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद 1316 में अलाउद्दीन की मौत हो गयी।

माना जाता है की चित्तोड़ की रानी पद्मवतीजी को पाने के लिए अलाउद्दीन ने 1303 CE में चित्तोड़ पर आक्रमण किया था जिसका उल्लेख लेखक मलिक मुहम्मद जायसी की कविता पद्मावत में आता है । इस युद्ध का लेख अवधी भाषा में 1540 में किया है।

अलाउद्दीन खिलजी एक शक्तिशाली सेनापति था जो भारतीय उपमहाद्वीप में सेना की देखरेख करता था। अलाउद्दीन खिलजी को इतिहास के उन शासको में गिना जाता है जिन्होंने मंगोल आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा की थी। अलाउद्दीन खिलजी विशाल और शक्तिशाली मंगोल सेना को पराजित किया था।

अलाउद्दीन खिलजी इतिहास के कठोर और निर्दानीय शासको में से एक है, उस समय उनकी विजय का डंका पुरे भारत में प्रसिद्ध था और खिलजी स्वयं को द्वितीय एलेग्जेंडर कहलाने से संकोच नहीं करता था ।

परन्तु अलाउद्दीन खिलजी के जीवन के अंतिम दिन काफी दर्दभरे और दुखदायी थे। एक बीमार और लाचार सेना नायक का अंजाम यही होता है की उसके राज्य का हाथ से चला जाना और आखिर यही हुआ। अलाउद्दीन कमजोरी का फायदा लेते हुए सेनापति मलिक काफूर ने पूरा साम्राज्य हथिया लिया। उस समय अलाउद्दीन बीमार और कमजोर हो गया था और 1316 AD में ही अलाउद्दीन की मृत्यु हो गयी थी।

इतिहासकारों ने अलाउद्दीन खिलजी को एक घमंडी और क्रूर योद्धा और शासक बताया है। लेकिन फिर भी वह एक सशक्त साम्राज्य खड़ा करने में नाकाम रहा और अपने साम्राज्य का विश्तार ज्यादा नहीं कर सका।

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के चार साल के भीतर ही खिलजी साम्राज्य का पतन हो गया था। अलाउद्दीन के छोटे बेटे शहाबुद्दीन को उसके तीसरे बेटे मुबारक शाह ने गद्दी से उतार दिया था और 1316 से 1320 AD तक शासन किया। लेकिन बाद में नसीरुद्दीन ने अंततः उनकी हत्या कर दी थी।

अलाउद्दीन खिलजी की रोचक बाते – Alauddin Khilji Interesting facts


अलाउद्दीन एक शक्तिशाली और बुद्धिमान और क्रूर शासक था। वह स्वयं को दूसरा एलेग्जेंडर कहता था। अलाउद्दीन को सिकंदर ए सनी के नाम से भी जाना जाता है।
अलाउद्दीन का साम्राज्य  गुजरात, रणथंबोर, मेवाड़, मालवा, जालौर, वरंगल, माबर और मदुराई तक फैला हुआ था।

अलाउद्दीन मंगोलों को कई बार युद्ध में पराजित कर चूका था। जालंधर (1298), किली (1299) और रवि (1306) ।

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान था। अलाउद्दीन खिलजी साम्राज्य का दूसरा सुल्तान था और खिलजी साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली सुल्तान भी है। 1296 से 1316 तक पुरे 20 वर्षो तक अलाउद्दीन ने शासन किया था।

अलाउद्दीन का सबसे होनहार सेनापति मालिक काफूर था। गुजरात युद्ध के समय मलिक काफूर की विशालकाय और शक्तिशाली सेना का उपयोग किया था।
1316 में अलाउद्दीन की हत्या में मालिक काफूर का हाथ था। 
अपने चाचा और ससुर जलालुद्दीन खिलजी की हत्या करने के बाद ही वह खिलजी साम्राज्य के शासक बना।
अलाउद्दीन खिलजी को निरंकुश, असहिष्णु, अनपढ़, किन्तु योग्य सेनानायक, महत्त्वाकांक्षी प्रशासक, लुटेरा, खूनी हत्यारा भी कहा जाता है
मुस्लिम साम्राज्यवाद को उन्नति के शिखर तक पहुंचाने में अलाउद्दीन खिलजी का बहुत बड़ा हाथ था। 
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